डागर जाट गोत्र का इतिहास

डागर जाट गोत्र का इतिहास

यदुवंशी श्रीकृष्ण जी की चौथी पीढ़ी में बृज की परम्परा में जाड़ेचा और यदुमान नाम के दो भाई थे। इनमें जाड़ेचा ने काठियावाड़ में अपने राज्य वैभव का विस्तार किया।

आज वहां भुज, जामनगर, ह्वौल, राजकोट, गूण्डल, मौर्वी आदि राजपूत राज्य जाड़ेचा को ही अपना पूर्वज मानते हैं।

तात्पर्य साफ है कि वे लोग पहले यदुवंशी जाट थे किन्तु राजपूत संघ स्थापित होने पर उसमें शामिल होकर राजपूत कहलाए। इसके दूसरे भाई यदुमान ने हिमालय की पर्वतमालाओं में अपना आधिपत्य स्थिर कर लिया।

पर्वत को भाषाभेद से डांग ही कहा जाता है। आपकी अधिकृत पर्वत श्रेणियों को यदु की डांग पर प्रसिद्धि प्राप्त हुई।

तब आपकी परम्परा के जाट क्षत्रिय डागा, डागुर एवं डीगराणा के नाम पर प्रख्यात हुए जो कि भाषावैषम्य से सर्वथा सम्भव है। सरहदी सूबा (पाकिस्तान) में इस वंश के जाट यदु की डांग ही कहलाते हैं।

इस वंश के जाट पंजाब में डागा और यू० पी० में डीगराणा कहलाते हैं। ये सब एक ही वंश या गोत्र के हैं। इस गोत्र के जाटों की अधिक आबादी बृज में ही आबाद है।

बृजमण्डल के अलीगढ़ में टप्पल के समीप लालपुर, नांगल, पिढौलिया, जड़ाना, दरयापुर, डागुरों के गांव भरतपुर राज्य की ओर से समरू साहब को दिए गये थे।

इनसे ब्रिटिश शासन में आये। सन् 1857 में स्वतन्त्रता संग्राम से 50 वर्ष पूर्व ठाकुर मुखरामसिंह ने डागुर नंगला नामक गांव मुरसान से 3 मील उत्तर में बसाया।

डागर जाट गोत्र का इतिहास

डागर जाट गोत्र का इतिहास – History of Dagar Jat tribe

देशवाल जाट गोत्र का इतिहास

देहली-शाहदरा के निकट निस्तौली, जलालपुर, ढिढार, सिकैड़ा, गाजियाबाद के पास चिपियाना, पलवल के निकट धतीर, जिला रोहतक में कबूलपुर, सुरखपुर, जोंधी (कुछ घर), पहलादपुर, दिल्ली प्रान्त में ढ़ांसा, शमसपुर, ऊजवा, इसापुर, झाड़ौदा कलां, मैदानगढी, मलिकपुर डागर जाटों के गांव हैं।

मैदानगढ़ी (निकट महरौली) गांव के डागर जाटों ने सन् 1988 ई० में गोमठ मन्दिर के चारों ओर 100 एकड़ भूमि सर्वजातीय सर्वखाप पंचायत क, जिसके अध्यक्ष श्री स्वामी कर्मपाल जी हैं, दान में दी है। यहां पर इस पंचायत का मुख्य कार्यालय स्थापित हो गया है।

गढ़वाल जाट गोत्र का इतिहास

आज इस 100 एकड़ भूमि का मूल्य दो अरब रुपये है। इसके अतिरिक्त इस गांव तथा निकट के 6-7 गावों ने लाखों रुपये की धनराशि इस पंचायत को दान में दी है। ये वीर दानी धन्यवाद के पात्र हैं।

जयपुर में हिण्डोन के समीप खरेटा, शेरपुर, आदि 24 गांवों की बस्तियां डागुर आर्य जाटों की हैं। भरतपुर में चैनपुरा, गगवाना, अटाली, टोला, बहसाल, हैरसोनी, आगरा में भरकौल, खेलड़ी आदि प्रसिद्ध गांव डागुर जाटों के हैं।

बिजनौर जिले की काव्यप्रसिद्ध स्रोतोवहामालिनी नदी और भगीरथी गंगा के दोआबा में प्रसिद्ध अभीपुरा गांव के डागुर, डीगराणा नाम पर प्रख्यात हुए।

बुलन्दशहर में खालौर, खदाना, बढपुरा के जाटों की प्रसिद्धि डोंगरी नाम पर हुई। प्रसिद्ध सन्त हरिदास डागर गोत्र के थे।

इस खाप में जाटों के 84 से अधिक गाँव है हिंडौल गोत्र के जाटो ने हिंडोन को बसाया था महाराजा … डागर जाटों को मिल गयी डागर जाट जांगल प्रदेश से आये थे कुछ समय बाद और डागर गोत्र के

जाट वीरों का इतिहास: दलीप सिंह अहलावत, पृष्ठान्त-1024

श्योराण जाट गोत्र

Randhir Singh

I am Randhir Deswal From Rohtak Haryana. I am a writer and a history student.

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