रघुवंशी जाट गोत्र का इतिहास

रघुवंशी जाट गोत्र का इतिहास

सूर्यवंश में महाराजा दशरथ के दादा रघु हुए जिनकी प्रसिद्धि के कारण उनके नाम पर सूर्यवंशी क्षत्रियों का संघ रघुवंशी कहलाया जो कि एक जाट वंश है (देखो प्रथम अध्याय सूर्यवंशी वंशावली)।

इन रघुवंशी जाटों की कई शाखायें हैं जिनमें एक सीकरी के स्थान पर रहने के कारण रघुवंशी जाटों का जत्था उस स्थान के नाम पर रघुवंशी-सीकरवार कहलाने लगा।

राणा सांगा और बाबर के संग्राम में ऐतिहासिक प्रसिद्धि प्राप्त सीकरी नामक स्थान रघुवंशी जाटों का बड़ा गढ था जो कि यमुना और चम्बल के मध्य वर्तमान आगरा जिले में स्थित है। यहां पर रघुवंशी जाटों का बड़ा मजबूत किला था तथा राजधानी थी।

देहली पर मुगल शासन स्थिर करने के लिये बाबर ने सीकरी को अधिकृत करना आवश्यक समझा था।

अतः बाबर ने सीकरी पर आक्रमण कर दिया। किन्तु वहां के रघुवंशी जाटों ने राणा सांगा का समर्थन प्राप्त करके घनघोर युद्ध करके बाबर को पराजित किया।

किन्तु बाबर के पोते सम्राट् अकबर ने अपने दादा की पराजय का बदला लेने के लिये सीकरी पर आक्रमण करके उसे जीत लिया। अकबर ने वहां पर महल बनवाये और अपने परिवार सहित वहां पर रहने लगा।

उसका नाम फतेहपुर सीकरी प्रचलित किया। यहां के महल आज भी देखने योग्य हैं। यह स्थान आगरा से रतलाम लाइन पर दूसरा स्टेशन है।

सीकरी से उजड़कर बाहर बसने वाले जाट भी रघुवंशी-सीकरवार नाम से ही प्रसिद्ध हुए। सीकरी से अछनेरा तक 200 गांव रघुवंशी सीकरवार जाटों के हैं। ग्वालियर में इनके 50 गांव हैं परन्तु ये सब राजपूत संघ से मिल गये हैं।

जिला मथुरा में रघुवंशी सीकरवार जाटों के 12 गांव हैं। इन गांवों में आंगाई गांव बड़ा प्रसिद्ध है। यहां के कुंवर हुकमसिंह जी, प्रधान सार्वदेशिक (सब देशों की) आर्य प्रतिनिधि सभा, बहुत यशस्वी पुरुष हुए।

रघुवंशी जाट गोत्र का इतिहास

रघुवंशी जाट गोत्र का इतिहास – सीकरवार History of Raghuvanshi Jat gotra

इनके पुत्र नगीना रियासत के अधिपति थे। दूसरी पुरानी रियासत जारखी थी, जो टूंडला के समीप है।

इसी वंश के ठाकुर मेवाराम हुए जिनके 12 पुत्रों ने अलीगढ जिले में सपेरा, जसराना, चितावर, सगीला, रामगढ, बेगपुर, सुखराल, किन्ढेरा, रसूलपुर, दुरसैनी, भवनगढ़ी और कलाई आदि गांवों को बसाया।

नोट – रूस में सीकरवार जाटों की बड़ी संख्या है, वहां इनको स्लाव (Slav) कहा जाता है। (देखो चतुर्थ अध्याय, शकवंश प्रकरण)।

  1. गहलौत जाटों का राज्य चित्तौड़ व मेवाड़ पर 713 ई० से 14वीं शताब्दी तक लगभग 500 वर्ष तक रहा। राजपूत संघ की शक्ति तो 14वीं शताब्दी में बनी। इनकी शक्ति इससे पहले स्थापित नहीं हुई।

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सलकलान जाट, वैदिक कालीन तंवर या तोमर चन्द्रवंशी जाट गोत्र की शाखा है। इस गोत्र का आदि-पुरुष सलकपाल था जो तोमर वंशज जाट था।

जिस समय अनंगपाल तंवर दिल्ली पर शासन करता था तब उसने सलकपाल तंवर को जि० रोहतक के गोरड़ गांव की जागीर दे दी थी, जिसमें आकर वह रहने लगा।

जिस प्रकार शक्तिसिंह से शक्तावत, कुम्भा से कुम्भावत प्रचलित हुए, इसी भांति सलकपाल से तंवर जाटों का संघ सलकलान नाम से प्रसिद्ध हुआ।

सलकलान जाट गोत्र का इतिहास – History of salkalan jat gotra

गोरड़ गांव से आकर सलकलान गोत्र के जाटों ने जिला रोहतक में समचाना गांव बसाया। यहां से इस गोत्र के लोग सामूहिक रूप से यमुना पार कर गये।

इधर तगा लोगों की आबादी थी जिससे टक्कर लेकर इन्होंने बड़ौत (जि० मेरठ) को अपना केन्द्रीय निवास स्थान बना लिया। शनैः-शनैः इनका इतना विस्तार हुआ कि इनके 84 गांवों का जनपद देश नाम पर प्रसिद्ध हो गया।

आज मेरठ जिले में इस वंश से अधिक संख्या किसी भी वंश की नहीं है। यहां पर इस वंश के जाटों की खाप को खाप सलकलान या देश कहा जाता है जिसका प्रधान गांव बड़ौत है।

कृतवर्मा का बागप्रस्थ किला जो बागपत के नाम पर आज प्रसिद्धि प्राप्त है, उसके चारों ओर के नहरी सिंचाई वाले भूभाग पर यह जाट वंश अधिकारी है। सन् 1857 की प्रथम स्वतन्त्रता क्रांति में सलकलान जाटों ने अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध किए।

बाद में अंग्रेजों ने इनकी जायदादें भी जब्त कर लीं थीं। बड़ौत की एक पट्टी के सलकलान जाट मुगलिया काल में मुसलमान हो गए जो मूले जाट कहलाते हैं।

बड़ौत में चलने वाले दो जाट कालिजों के अतिरिक्त गांव-गांव में हाई स्कूल हैं। बड़ौत के अतिरिक्त बावली, बामनौली, हिलवाड़ी, शिकोहपुर, वाजिदपुर, गुराना, बिजवाड़ा, सिरसली, जोहड़ी, जौन्मना, मलकपुर, जमाना, सूप, बूढ़्पुर, कंडेरा, नस्तौली, बरवाला, बिजरौल, किशनपुर, बिराल, कासपुर खेड़ी आदि सलकलान जाटों के बड़े प्रसिद्ध गांव हैं।

बावली अपनी जनसंख्या में प्रान्त में सबसे बड़ा गांव माना जाता है। शिकोहपुर का परिचय केवल प्रवरवाग्मी चौ० पृथ्वीसिंह ‘बेधड़क’ की कवित्वकला में गायन का संयोग हो जाने पर ही हुआ।

रघुवंशी जाट गोत्र का इतिहास – सीकरवार History of Raghuvanshi Jat gotra

जिला मुजफ्फरनगर में हैदरनगर, गढ़ी अजरू, वीनपुर, शाहपुर गांव इन सलकलान जाटों के हैं। जिला बिजनौर में बकैना, मेलनपुर, हुसैनपुर, हिरनाखेड़ी, वमनपुरा, मुस्तफाबाद, सेखपुरी, मलेशिया आदि 12 गांव सीधे समचाना (जि० रोहतक) से ही आकर बसे थे, जो अब समचानिया तंवर कहलाते हैं।

जिला मुरादाबाद में गोरड़ (जि० रोहतक) से जाकर सदरपुर और ग्वारऊ गांव बसे हुए हैं जो गोरड़िया सलकलान तंवर कहलाते हैं।

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Randhir Singh

I am Randhir Deswal From Rohtak Haryana. I am a writer and a history student.

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