गुलिया गौत्र का इतिहास

गुलिया गौत्र का इतिहास

यह गुलिया जाट गोत्र सूर्यवंशी गौर जाट वंश की शाखा है। सूर्यवंशी चक्रवर्ती सम्राट् मांधाता ने अपनी माता गौरी के नाम पर अपनी गौर उपाधि धारण की। मांधाता के वंशधर गौर नाम से प्रसिद्ध हुये। यह गौर जाट गोत्र है। इस गौर जाट गौत्र की शाखा गुलिया-गुलैया-तातराणा जाट गोत्र हैं

(देखो तृतीय अध्याय गौर वंश प्रकरण)।

गुलिया जाटों का निवास एवं राज्य मध्यपूर्व में रहा है (देखो चतुर्थ अध्याय, मध्यपूर्व)। सन् 51 का वरदक (Wardak) में शिलालेख है जो कि अटक के निकट है।

उस पर लिखा है कि भगवान् बुद्ध का स्मारक चिन्ह एक स्तूप में वगरामारेगा (Vagramarega) द्वारा स्थापित किया गया था जिसका वंश गुलिया था। यह गुलिया जाट वंश है।

ग्रेवाल जाट गोत्र का इतिहास – Sikh Jatt Sarname

गुलिया गौत्र का इतिहास
गुलिया गौत्र का इतिहास

गुलिया गौत्र का इतिहास – History of Gulia Gautra

इन गुलिया जाटों का निवास तथा राज्य काबुल क्षेत्र में था। पुराणों में इनका नाम कुलया/कुलिया लिखा है। मार्कण्डेय पुराण में लिखा है कि वे लोग मत्स्य (जाट गोत्र) लोगों के साथ मध्यभारत में थे।

इन गुलिया जाटों का एक दल चलकर रोहतक जिले के बादली गांव में आया और यहां से बादली ग्राम के चारों ओर फैलकर 24 गांवों में आबाद हो गये। गुलिया जाट खाप में 24 गांव हैं जिनका प्रधान गांव बादली है।

बादली ग्राम से ताताराम नामक गुलिया जाट अपने कुछ साथियों सहित जिला बिजनौर के झालू गांव में जाकर आबाद हो गया। वहां पर इनके वंश की ताताराणा नाम से प्रसिद्धि हुई।

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बादली गांव के गुलिया जाट वीर योद्धा हरवीरसिंह

तैमूरलंग ने सन् 1398 में भारत पर 92000 घुड़सवार सेना से तूफानी आक्रमण किया था। जब उसकी सेना दिल्ली से हरद्वार जा रही थी तब हरयाणा सर्वखाप की पंचायती सेना ने उससे रास्ते में युद्ध किया।

उस सेना के उप प्रधान सेनापति 22 वर्षीय वीर योद्धा हरवीरसिंह गुलिया ने शेर की तरह झपटकर तैमूरलंग की छाती पर भाला मारा जिसके घाव से वह अपने देश समरकंद में पहुंच कर मर गया।

वीर हरवीरसिंह शत्रु की मार से वहीं शहीद हो गया (पूरी जानकारी के लिये देखो चतुर्थ अध्याय, तैमूरलंग और जाट प्रकरण)।

जाट गोत्र गुलिया, राठी और दलाल है। साम्राज्यों का विकास-स्थान रहे भारतीय उपमहाद्वीप को इसके सांस्कृतिक और आर्थिक सफलता के लंबे इतिहास के लिये जाना जाता रहा है।

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देशवाल जाट गोत्र का इतिहास

Randhir Singh

I am Randhir Deswal From Rohtak Haryana. I am a writer and a history student.

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1 Response

  1. 02/09/2020

    […] गुलिया गौत्र का इतिहास […]

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