Who is the killer of Sir Chhotu Ram? / सर छोटू राम का हत्यारा कौन है?

Who is the killer of Sir Chhotu Ram

Who is the killer of Sir Chhotu Ram? / सर छोटू राम का हत्यारा कौन है?

यह प्राकृतिक सिद्धान्त है कि जो पैदा होगा वह अवश्य मृत्यु को प्राप्त होगा । कहते हैं कि चौ० साहब को देहान्त से कुछ दिन पहले से ही उनके पेट में अचानक दर्द रहने लगा था । कुछ ही दिन में मलेरिया और पेचिस ने भी घेर लिया ।

उनके निजी डॉक्टर नंदलाल दवा दारू करते रहे लेकिन 9 जनवरी 1945 को प्रातः 10 बजे उनके हृदय में पीड़ा हुई और दम घुटने लगा । उस समय संयुक्त पंजाब के प्रधानमन्त्री (उस समय राज्य के मुख्यमंत्री को प्रधानमन्त्री कहा जाता था) सर खिजय हयात खां तिवाणा को बुलाया गया ।

चौ० साहब हयात खां से गले से लिपट गए और धीरे से कहा – हम तो चलते हैं भगवान सबकी मदद करे । ये उनके अंतिम शब्द थे। यह कहकर चारपाई पर फिर से लेट गये और सदा के लिए भगवान के पास चले गए ।

यह देखकर हयात साहब और परिवार के उपस्थित अन्य लोग सभी रोने लगे । यहां इन्सानियत रो रही थी। हिन्दू मुस्लिम जाट भाईचारा रो रहा था, जाट कौम के अरमान रो रहे थे और सबसे बढ़कर जाट कौम का भविष्य रो रहा था ।

यह देहान्त चौ० साहब के स्थूल शरीर का था जिसकी हमें उस समय परम आवश्यकता थी ।

इससे एक दिन ही पहले 8 जनवरी 1945 को चौ० साहब ने पंजाब के राजस्व मन्त्री होते हुए भाखड़ा बांध का पूर्ण सर्वे करवाकर और इसका निरीक्षण करने के बाद इस योजना पर अपने हस्ताक्षर किए थे जो उनके अन्तिम हस्ताक्षर साबित हुए ।

Who is the killer of Sir Chhotu Ram? / सर छोटू राम का हत्यारा कौन है?

इसके अतिरिक्त पंजाब से 80 वर्षीय सरदार राजेन्द्र सिंह निज्जर जो वर्तमान में इंग्लैण्ड में रहते हैं, ने चौ० साहब की मृत्यु का कारण बतलाते हुए मनोज दूहन को ई-मेल किया जो इस प्रकार है:-

Manoj, My father did say that, that Lalas used to welcome Chhotu Ram Ohlayan with BLACK JHANDIS. He did say that he was given poison in the food and he had stomach problems overnight. But our Haryanavi Jats should know better.

There is no doubt that he was poisoned. Now, most people are frightened of the Khatris as they are Rulers of the Kalyug. So, better do research with close relatives.

All the people of his age have died, both in India & Pakistan. Pakistan Jatts were more faithful than our Panjabi Jatts.

There is Jatt Sabha in Pakistan. If you go on the Apna Panjab website, www.apna.org.com, you might find more information too. I will keep you informed.

Uncle-Ch.Rajender Singh Nijjar Jatt. England

अर्थात् – मनोज, मेरे पिता जी ने बतलाया था कि चौ० छोटूराम ओहलान को लाला लोग (हिन्दू पंजाबी अरोड़ा व खत्री) काली झण्डियां दिखाया करते थे । उन्होंने बतलाया था कि उनको खाने में जहर दिया गया था, जिसकी वजह से रात से ही उनके पेट में तकलीफ पैदा हो गई थी ।

लेकिन हमारे हरयाणवी जाटों को इस बारे में अधिक ज्ञात होना चाहिए । इसमें कोई भी संदेह नहीं है कि उनको जहर दिया गया था । आजकल अधिकतर लोग खत्री समुदाय से डरे हुए हैं, क्योंकि यह समुदाय इस कलयुग का शासक है । इसलिए उनके नजदीकी सम्बन्धियों से इस बारे में और अधिक शोध करना बेहतर होगा ।

उस समय के सभी बुजुर्ग भारत व पाकिस्तान में मर चुके हैं । पाकिस्तान के जाट पंजाबी जाटों से अधिक वफादार थे । पाकिस्तान में जाट सभा है । यदि आप ‘अपना पंजाब’ बैवसाईट www.apna.org.com में जाएंगे तो अधिक जानकारियां मिलेंगी –

चाचा – राजेन्द्रसिंह निज्जर जट्ट, इंग्लैंड ।

सर छोटू राम का हत्यारा कौन है?

लेकिन मेरा आज का विषय उनके स्थूल शरीर त्यागने की जांच का नहीं बल्कि उनकी सूक्ष्म विचारधारा को जानने तथा उस विचारधारा के हत्यारों के बारे में जानने का हैं क्योंकि उनकी विचारधारा की हत्या उनके स्थूल शरीर की मौत से जाट कौम के लिए कहीं अधिक घातक सिद्ध हुई ।

क्योंकि कोई भी क्रान्ति, व्यवस्था में बदलाव व सुधार किसी भी विचारधारा के तहत होता है ।

चौ० साहब की विचारधारा धीरे-धीरे लेकिन बड़े सशक्त तरीके से संयुक्त पंजाब में ही नहीं पूरे उत्तर भारत (जाट बाहुल्य क्षेत्र) में अपना रंग ला रही थी ।

इसकी शुरुआत इन्होंने सन् 1911 में ही आगरा में अपनी वकालत की पढ़ाई पूर्ण करते ही शुरू कर दी थी और उन्होंने आगरा में जाटों के बच्चों के लिए होस्टल बनवाया ।

उसके बाद 1911 में जार्ज पंचम के आगमन पर सोनीपत तहसील को दिल्ली जिले से निकालकर रोहतक के साथ मिलाने पर वे सन् 1912 में रोहतक आकर वकालत करने लगे ।

Who is the killer of Sir Chhotu Ram
Sir Chhotu ram

उन्होंने सन् 1913 में रोहतक जाट हाई स्कूल की स्थापना करवाई । कहने का अर्थ यह है कि उनकी विचारधारा का प्रथम बिन्दु शिक्षा था । चौ० साहब यह भली भांति जानते थे कि उनकी जाट कौम गांव में रहती है और शिक्षा में पिछड़ी हुई है ।

जब 6 नवम्बर 1920 को उन्होंने रोहतक जिले के कांग्रेस अध्यक्ष पद को इसलिए त्याग दिया क्योंकि वे कर्मचन्द गांधी के असहयोग आन्दोलन के कट्टर विरोधी थे । इसके कारण, बोलना ले सीख और दुश्मन को पहचान ले लेख में पहले ही विस्तार से लिख दिया है ।

Mera Dewta Mera Ram

चौ० साहब जानते थे कि शिक्षा और आर्थिक स्तर एक दूसरे के पूरक हैं इसलिए उन्होंने शिक्षा के साथ-साथ अपनी विचारधारा को पूरी तरह आर्थिक पर केन्द्रित कर लिया था ।

कांग्रेस छोड़ने के बाद उन्होंने सर फजले हुसैन से मिलकर पंजाब में यूनियनिस्ट पार्टी (जमींदारा पार्टी) का गठन किया जिसके द्वारा अपनी विचारधारा को अमलीजामा पहनाया जा सके ।

वैसे सन् 1916 से ही संयुक्त पंजाब में गैर राजनीतिक जमींदारा एसोसिएशन बनी हुई थी जो सिख जाटों ने बनाई थी जिसमें कुछ हिन्दू भी सम्मिलित हो गए थे । लेकिन जमींदारा पार्टी में सभी जाट इकट्ठे हो गए थे ।

उन्होंने अपनी विचारधारा को जाट जन तक पहुंचाने के लिए सन् 1916 में उर्दू साप्ताहिक जाट गजट निकालना शुरू किया जो उनकी विचारधारा का आईना था । क्योंकि दूसरे हिन्दू अखबार जाट विरोधी थे (आज भी हैं),

स्वयं हिन्दू महासभा भी कांग्रेस समर्थक थी । वे जाट गजट में ‘ठगी के बाजार की सैर’, ‘बेचारा जमींदार’, तथा ‘जाट नौजवानों के लिए नुस्खे’, आदि नामों से लेखमाला निकालते रहे ।

उनके संदेश धीरे-धीरे गांवों के जाटों तक पहुंचने में लगे थे । हालांकि गांव के अनपढ़ जाटों तक पहुंचने के लिए बड़ी परेशानी थी क्योंकि हिन्दू अखबार चौ० साहब के विरोध में धड़ाधड़ लिख रहे थे और गांवों में रहने वाली गांधीवादी जातियां इनका धुआंधार प्रचार करती थी ।

Who is the killer of Sir Chhotu Ram? / सर छोटू राम का हत्यारा कौन है?

यहां एक बनाम अनेक की लड़ाई थी । इसी कारण चौ० साहब को पहला चुनाव सन् बादली से 22 मतों से हारना पड़ा था लेकिन दूसरी बार सन् 1923 में कई हजार मतों से जीते ।

हिन्दू पंजाबी अखबार चौ० साहब द्वारा कांग्रेस छोड़ने के कारण अंग्रेजों के दास, पिट्ठू, टोडी, देशद्रोही, गद्दार व विश्वासघाती आदि पदवियों से सुशोभित करते थे ।

चौ० साहब इन सबका उत्तर यह कहकर देते थे – ‘जाट भाइयों जब तक ये अखबार मेरी बुराई करते हैं तब तक समझते रहना कि मैं तुम्हारे हित में लगा हूं । जिस दिन ये मेरी प्रशंसा करने लगे तो समझना कि मैंने तुम्हारा साथ छोड़ दिया है और मैं बिक चुका हूँ ।’

लेकिन इस दुष्प्रचार से हमारे जाट भाई भी अछूते नहीं रह पाए और इसी कारण आज भी हमें कुछ ऐसे जाट मिल जाएंगे जो चौ० साहब के लिए ऐसे ही शब्दों का प्रयोग करते हैं । ये जाट भाई अज्ञानी और मूर्ख हैं या स्वयं किसी के पिट्ठू हैं ।

रोहतक से एक चौधरी रामसिंह जाखड़ जो स्वयं ‘हरियाणा तिलक’ पत्र के संपादक नेकीराम शर्मा के पिट्ठू थे, ने तो चौ० साहब के विरोध में एक पूरी पुस्तक ही लिख डाली ।

यह पुस्तक आज भी जिला पुस्तकालयों में उपलब्ध है क्योंकि इसका वितरण 1991 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भजनलाल ने सरकारी पैसे से कराया गया था ।

जिसके विरोध में रोहतक के जाटों ने फैसला लिया कि जिसे भी रामसिंह जाखड़ मिले उसके मुंह पर थूका जाए । लेकिन अभागा रामसिंह दो साल के भीतर ही चल बसा।

लेकिन नेकीराम शर्मा के किसी पिट्ठू ने उसकी मौत पर एक आंसू तक नहीं बहाया । इसलिए यह सच्चाई है कि जिसे अपनी कौम धिक्कार देगी उसे कोई दूसरा कभी गले नहीं लगायेगा ।

Who is the killer of Sir Chhotu Ram? / सर छोटू राम का हत्यारा कौन है?

Second World War and Jats

बोलना ले सीख और दुश्मन को ले पहचान

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